रायपुर : खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल नवागढ़ रामायण मानस गायन कार्यक्रम में हुए शामिल

छत्तीसगढ़ के खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री श्री दयालदास बघेल बेमेतरा जिले के नवागढ़ शंकर नगर में आयोजित रामायण मानस गायन कार्यक्रम में उपस्थित हुए। उन्होंने इस महोत्सव के महत्व को समझते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में रामायण मानस का विशेष महत्व है। यह न केवल हमारी धारोहर है, बल्कि इसके माध्यम से हम अपनी संस्कृति और मूल्यों को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

रामायण मानस मंडलियों का प्रदेश में विशेष महत्व है। इन मंडलियों का उद्देश्य न केवल भगवान राम की महिमा और कथाओं को सुनाना है, बल्कि इसके माध्यम से वे भावनाएं और मूल्यों को भी साझा किया जाता है जो हमारे समाज की नीति और आचार-व्यवहार को निर्धारित करते हैं।

मंत्री श्री दयालदास बघेल ने इस कार्यक्रम में भाग लेते हुए इस महत्वपूर्ण संगठन की सराहना की और उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ की संस्कृति के एक अभिन्न अंग के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि रामायण मानस के माध्यम से हम न केवल धार्मिक आदर्शों को जानते हैं, बल्कि इससे हमें जीवन के मूल्यों, नैतिकता और समाज के साथी के रूप में जोड़ने का अवसर भी मिलता है।

छत्तीसगढ़ में रामायण मानस के गायन कार्यक्रम एक सामाजिक और सांस्कृतिक पहल के रूप में भी देखे जा सकते हैं। ये कार्यक्रम समाज के लोगों को एक साथ लाने और उन्हें एक ही मंच पर जोड़ने का एक अच्छा माध्यम हैं। इन मंडलियों के माध्यम से हम अपने परंपरागत गायन और कथाओं को आज की पीढ़ियों तक पहुंचा रहे हैं और इससे हमारी संस्कृति की अच्छी रफ्तार बनी रहती है।

मंत्री बघेल ने इस समारोह को उन सभी कार्यक्रमों में शामिल होने की सराहना की जो संस्कृति, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने में सहायक होते हैं। उन्होंने इस मंडली के सदस्यों को बधाई दी और उनके योगदान की सराहना की।

इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम हमारे समाज को एकजुट करते हैं और हमें हमारी संस्कृति और विरासत के प्रति गर्व महसूस कराते हैं। ये कार्यक्रम न केवल एक मनोरंजन का साधन होते हैं, बल्कि इनके माध्यम से हम अपने आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को और भी गहराई से समझते हैं और उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं।

इस अवसर पर मंत्री श्री दयालदास बघेल ने सभी संगठनों और सदस्यों को ढेर सारी शुभकामनाएं दी और सांस्कृतिक क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना और सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने के लिए इसी तरह के आयोजनों को और भी बढ़ावा देने की अपील की।

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