रायपुर : श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन 22 जनवरी को छत्तीसगढ़ में रहेगा आधे दिन का शासकीय अवकाश

आयोध्या में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ में 22 जनवरी को आधे दिवस का शासकीय अवकाश रहेगा। इस पौराणिक और धार्मिक घड़ी में, छत्तीसगढ़ शासन ने अपने नागरिकों को इस अवसर के महत्वपूर्णीयता के प्रति जागरूक करने के लिए एक आधिकारिक घोषणा की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस खास मौके पर लोगों से मिलकर शुभकामनाएं दी हैं और उन्होंने इस अवसर की महत्वपूर्णीयता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ और भगवान श्रीराम के बीच गहरा संबंध है, और छत्तीसगढ़ उनका ननिहाल है। भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ था, लेकिन उनकी माता कौशल्या का जन्म छत्तीसगढ़ के पावन भूमि में हुआ था। छत्तीसगढ़ उनके वनवास के दिनों का साक्षी है, और यहां के जंगलों में व्यतीत हुए 14 वर्षों का वनवास भगवान श्रीराम ने आपके नाना-नानी के साथ बिताया था।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के लोगों से आशीर्वाद लेते हुए कहा कि 22 जनवरी को आधे दिवस का अवकाश रखा गया है ताकि सभी लोग रामलला के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में भाग ले सकें और इस धार्मिक और सांस्कृतिक घड़ी का आनंद उठा सकें।

श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के इस पावन अवसर पर राज्य के सभी शासकीय कार्यालयों और संस्थानों में 22 जनवरी तक सामान्य अवकाश रहेगा, जिससे लोग अधिक से अधिक भाग लें और उत्सव में शामिल हो सकें।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश के मंदिरों में विशेष सज-सज्जा की गई है, और विभिन्न धार्मिक आयोजन भी आयोजित किए जा रहे हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि लोग इस पावन मौके को सही ढंग से मना सकें और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल हो सकें।

छत्तीसगढ़ राज्य के सभी निवासियों को इस महत्वपूर्ण अवसर पर आदर्श और धार्मिक भावना के साथ योजना बनाने और इसमें भाग लेने का आमंत्रण किया गया है। इस पावन दिन को विशेष बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों और पूजा-अर्चना की जा रही है, जिससे लोग श्री रामलला की कृपा को महसूस कर सकें और उनके साथ इस धार्मिक यात्रा में शामिल हो सकें।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने सभी नागरिकों को एक एक दूसरे के साथ मिलकर रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के इस महत्वपूर्ण पल में भाग लेने के लिए प्रेरित किया है। इसके माध्यम से समृद्धि, शांति, और सभी के लिए खुशहाली की कामना की जा रही है।

इस पुनर्निर्माण के महत्वपूर्ण समय में, यह एक सकारात्मक कदम है जो लोगों को एक साथ आने और एक-दूसरे के साथ मिलकर अपने धार्मिक और सांस्कृतिक आधारों को मजबूती से महसूस करने का एक अद्वितीय अवसर प्रदान करता है। इस अवसर को एक आदर्श भारतीय समाज की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जो लोगों को एक सजीव और सशक्त समृद्धि की दिशा में अग्रसर करने में मदद कर सकता है।

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