टीचर ने स्वीपर नहीं आने की कही बात, बीईओ ने जांच के दिए आदेश

जशपुर जिले के बगीचा विकासखण्ड में शिक्षक स्कूली छात्रों को साफ-सफाई के काम करवा रहे हैं। एक वीडियो में दर्शाया गया है कि छात्राएं गोबर ढुलाई और सड़कों को साफ कर रही हैं।

यह संवेदनशील मुद्दा है और इसने लोगों में विवाद उत्पन्न किया है। इस पर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भी अपने विचार व्यक्त किए हैं।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य विद्यालय के छात्रों में साफ-सफाई के महत्व को समझाना है। वे इसे एक शिक्षात्मक अनुभव के रूप में देख रहे हैं, जिससे बच्चे स्वयं को समर्पित करने के लिए प्रेरित हों।

छात्राओं को साफ-सफाई का महत्व समझाने के लिए यह पहल उपयुक्त हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों के अनुसार, इसे शिक्षा के माध्यम से ही नहीं, बल्कि उचित संसाधनों और स्वीपर की उपलब्धता के माध्यम से भी होना चाहिए।

बच्चियों को साफ-सफाई के काम में लगाने का कारण यह है कि विद्यालय के पास पर्याप्त स्वीपर नहीं हैं। इसके परिणामस्वरूप, शिक्षकों को ऐसे विकल्पों का सहारा लेना पड़ रहा है जो विद्यालय के क्षेत्र में साफ-सफाई का काम कर सकते हैं।

यह पहल बच्चों को समाज सेवा के महत्व को समझाने का एक माध्यम भी हो सकती है। वे इसके द्वारा अपने जीवन में सामाजिक उत्तरदायित्व का अहसास कर सकते हैं।

हालांकि, यह भी सत्य है कि साफ-सफाई के काम को स्वीपरों के द्वारा किया जाना चाहिए, जिससे बच्चों को उचित शैक्षिक और सामाजिक माहौल मिल सके। यह उन्हें उचित समय प्राप्त करने और अधिक समय को शिक्षा में लगाने की स्थिति में मदद कर सकता है।

समाज में इस विवादित चरण पर ध्यान देना आवश्यक है, ताकि साफ-सफाई के महत्व को समझाने के साथ-साथ, स्वीपरों की उपलब्धता को भी सुनिश्चित किया जा सके। विद्यालयों के प्रबंधन को उचित संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए ताकि छात्रों को शिक्षा में अधिक समय दिया जा सके और वे समाज में बेहतरीन नागरिक बन सकें।

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